पितृ दिवस
राह सत्य की बड़ी कठिन है
कोशिश करके चलते रहना
आगे-आगे पिता चलेंगे
तुम पद चिन्हों पर चलना
यदि तपोगे स्वर्ण बनोगे
द्रवित होकर ढलते रहना
सहनशक्ति से बनोगे अर्चा
नही सड़क पर डलते रहना
©दुष्यन्त 'बाबा'
यह ब्लॉग गांव देहात की जीवन शैली से अवगत कराने तथा ग्राम्य भाषा और बोलियों को वैश्विक पटल पर लाकर हिंदी साहित्य की धारा में सम्मिलित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यहाँ प्रत्येक कहानी, कविता, निबन्ध और संस्मरण में ग्रामीण आँचल की झलक अवश्य दिखाई देगी। यदि आप भी ग्रामीण पृष्ठभूमि से है या इसमें रुचि रखते है तो ब्लॉग को फॉलो कर सकते है।🙏
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