छद्म चलचित्र : एक आघात
साथियों! आज सोशल मीडिया हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। हम प्रत्येक दिन की शुरुआत सुप्रभात/सद्विचार संदेश के साथ करते है जिनका व्यक्ति पर कोई प्रभाव नही पड़ता और सम्बंधित व्यक्ति बिना पढ़े ही उसे हटा देता है परन्तु समाज के यथार्थ में व्याप्त छोटी-छोटी बुराइयों पर कुठाराघात करने का न तो साहस कर पाते है और न ही चर्चा, बल्कि मन ही मन कुंठित रहते है। आज-कल संदेशों के आदान-प्रदान हेतु व्हाट्सएप का प्रचलन भी बहुत अधिक बढ़ गया है। या यूं कहिए कि हमारे जीवन का हिस्सा ही बन गया है। ऐसे में कुछ लोग छद्म संदेश भेजकर इतनी घटिया हरकत कर देते हैं कि व्यक्ति को तत् संदेश से पहुँचने वाले आघात/अपमान से उभरने में बहुत समय लग जाता है। ऐसी ही अपने साथ हुई दो घटनाओं को उल्लेख कर रहा हूँ। प्रकरण-1 बात उन दिनों की है जब पत्नी अपनी शिक्षा पूर्ण करने के लिए अपने मायके में थी वस्तुतः मैं भी सप्ताह में एक या दो बार ससुराल में चला ही जाता था। एक दिन सासु मां, पत्नी और मैं किसी विषय पर चर्चा में मशगूल थे। छोटे साले साहब को मोबाइल चलाने को बहुत शौक था और उन्होंने मेरा मोबाइल लिय...