वीर सपूत चंद्रशेखर
भारत मां तुम धन्य हो गयी जो चंद्रशेखर आजाद दिया। ऐसे क्रांतिकारी वीर दे दिए जिन्होंने देश आजाद किया।। सीताराम तिवारी माता जगरानी ने ऐसा कर्म पुण्य किया। पुनर्जन्म के सत्कर्मों से आजाद ने कोख को धन्य किया।। तेईस जुलाई उन्नीस सौ छः में श्रावण की शुक्ला द्वितीया। ग्राम भावरा, जनपद झबुआ, मध्यप्रदेश में अवतार लिया। जन्म के साथ ही गुलामी देखी और होता अत्याचार दिखा। भारत में भारत के लोंगो पर ही होता फिरंगी राज दिखा। भारत से 'सोने की चिड़िया' का भी छिनता ताज दिखा। अन्न के लिए थी मारामारी हर कोई भूंखा मोहताज दिखा।। भारत मां की रक्षा करने का अपने-आप ही प्रण लिया।। इसीलिए तो खेल-कूद में बन्दूकें चलाना भी सीख लिया। विश्नाथ वैशम्पायन संग असहयोग आंदोलन कूंच किया। इसी कूंच ने स्वतंत्रता संग्राम का ऐसा दीवाना बना दिया। मन्मथनाथ से पहली प्रेरणा सचीन्द्र सन्याल अभिन्न मिले। बटुकेश्वर संग भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू से मित्र मिले।। खड़े कटघरे चन्द्रशेखर जब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सवाल किया। स्वयं नाम आजाद पिता स्वाधीनता घर को जेल बता दिया।। आनन्द भवन से क्रोधित होकर साइकिल पर सवार चले। क्रांतिकारियों ...