विश्वास का प्रायश्चित (कहानी)
बलराम सिंह सेवानिवृत्ति के बाद कार्यालय स्टाफ से विदाई ले रहे थे, सामान का ट्रक घर जाने के लिए तैयार खड़ा था। मन ही मन सोच रहे थे कि घर से लाए ही क्या थे! सिपाही की नौकरी लगी थी तो घरवालों ने एक पुराना खादी का लिहाफ और एक पुराना सा गद्दा सीमेंट के कट्टे में बांध कर दे दिया था। आज पूरा घर सामान से भरा है और एक ट्रक यह भी, सामान रखने तक की भी जगह नहीं है।
खुशी खुशी विदाई ली घर पहुंचे बाहर से ही आवाज लगाई "अरे! शीला यह सामान उतरवा लो" शीला सामान उतरवाने में लग गई तब तक रजनी पानी का गिलास लेकर बलराम के सामने उपस्थित हो गई "बाबूजी पानी लीजिए"। रजनी जो कि बलराम के पुत्र बंसल की पत्नी है। बलराम रजनी के सेवाभाव से ओतप्रोत आज खुद को बड़ा गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। शहर का सबसे प्रतिष्ठित कॉलोनी में टी-पॉइंट पर 220 वर्ग मीटर में मकान है। बलराम ने शाम को ही पेंटर को बुलाया और घर के बाहर लगी नेम प्लेट पर लिखे पुलिस उपाधीक्षक शब्द के आगे छोटा सा 'से0नि0' लिखवा दिया। अगले ही दिन बेटे की फ्लाइट थी उसको अमेरिका जाना था चूँकि उसकी जॉब ही अमेरिका में थी अभी 1 साल पहले तो शादी ही हुई थी। जॉब लगने के बाद वह बहुत मुश्किल से बलराम की रिटायरमेंट के लिए आ सका था। नहीं तो 1 साल में आया ही कितना था।
बेटे के जाने के कुछ ही दिन बीते थे कि घर में लगा एसी खराब हो गया बलराम की पोस्टिंग इस जिले में रही थी हर कोई उन्हें बखूबी जानता था उन्होंने किसी जानने वाले को कॉल लगाया और कहा कि "यार! घर एसी खराब हो गया है एक मिस्त्री भेज दो" आधे घंटे में दरबाजे की घंटी बजती है दरबाजा खोला तो देखा कि एक छरेरा नौजवान लड़का मिस्त्री के रूप में सामने खड़ा है। यह क्या! बलराम उसे देख एकदम चौक गए और कहा "आजम तुम कैसे हो बेटे आओ! आओ!" अरे शीला! यह देखो आजम... अरे! यह तो और भी अच्छा हुआ अब तो इस घर की कोई भी समस्या नहीं रहेगी, कोई भी काम होगा तो आजम कर दिया करेगा। बलराम को आजम पर बहुत विश्वास था क्योंकि जब बलराम कोतवाली के कोतवाल हुआ करते थे तब आजम लगभग 12 साल का था तभी उसकी मां छोड़ गई थी आजम के पिता ने इसे बलराम के सुपुर्द कर दिया। बलराम और शीला ने इसे पूर्ण स्नेह के साथ पुत्र की तरह पाला था।
आजम आते ही ए0सी0 ठीक करने लग गया। ए0सी0 ठीक होकर निपटा कि आजम हाथ धोने चला गया तभी भोलाराम ने रजनी को आवाज लगाई "अरे! रजनी बेटा दो कप चाय बना लो" रजनी दौड़ी तेजी से चाय बना कर ले आयी। जब रजनी चाय परोस रही थी तभी आजम की नजर रजनी की नजर से मिल गयी। दोनों के शरीर में बिजली सी कौंध गयी। क्योंकि आजम को बलराम की बातों से ये पता चल चुका था कि रजनी बिना पति के रहती है। और अभी नवविवाहित है। जब आजम की नजर बदन पर पड़ी तो देखता ही रह गया उसकी घूरती नजरों से रजनी भी स्वयं को कहां बचा पाई। उसने भी आजम की नजरों को पढ़ लिया। इधर बलराम ने आजम का नंबर शीला के मोबाइल में फीड करा दिया था कि एक बार को अगर मैं घर पर मौजूद न रहूं तो आजम को बुला लिया करो। घर के कोई काम की चिंता अब मत करना। आजम चला गया, बात आई गई हो गई।
किंतु रजनी के मन से आजम की नजर आज भी ओझल नहीं हुई थी। नवविवाहिता शयन कक्ष में अकेली हो तो विरह की अग्नि में जलना स्वभाविक है क्या-क्या विचार उसके मन में नहीं आते, मगर दुर्भाग्य है कि उसे समझ कौन पाया है। उसने आजम के करीब आने का मन बना लिया। एक दिन किसी काम के बहाने शीला से मोबाइल लेकर रजनी ने आजम का नंबर निकाल लिया। एक दो बार तो छोटे-मोटे काम के लिए भी रजनी ने उसे बुला लिया। बात आगे बढ़ने लगी। आजम ने भी उसे मैसेज करने शुरू कर दिए दोनों के संबंध में अब बहुत गहरा रूप ले चुके थे। जब कभी बलराम और शीला बाहर जाते हैं। तो रजनी और आजम घर में अंतरंग होकर पूरी मस्ती करते थे।
इसी बीच रजनी पेट से हो गयी थी। डिलीवरी का समय नजदीक था, घर में बड़ी धूमधाम से खुशियां मनाई जा रही थी और रजनी को पुत्र की प्राप्ति हुई। घर में सभी लोग बहुत खुश थे। वंश बढ़ोत्तरी के लिए पहला वारिस जो मिला है। रजनी ने बंसल से पुत्र के जन्म पर घर आने को पहले ही कह दिया था जैसे ही सूचना मिली तो बंसल जैसे-तैसे छुट्टी लेकर आने का मन बना लिया। मगर आप आते-आते भी चार दिन लग गए। दो दिन बाद बेटे की छठी का कार्यक्रम भी हो गया। रजनी का सुझाव था 'कि घर का पहला बच्चा है इसलिए किसी अच्छे होटल में इसके देवोत्थान का आयोजन किया जाए और वैसे भी इतने दिन में तो तुम आते हो, फिर भी कोई पार्टी ना हो, वैसे भी पापा के रिटायरमेंट के बाद हमने किया ही क्या है' सभी ने 'हां' में सहमति भर दी।
आज घर मे बहुत चहल-पहल है। सभी आज के कार्यक्रम में जाने की तैयारियों में लगे हैं। अचानक रजनी का फोन बजा और रजनी की मां रजनी से बात करने लगी बात करते-करते के उन्होंने दमाद से बात कराने को कहा रजनी ने चलते हुए फोन वंशज के हाथों में दे दिया और अपने कामों में लग गई। जैसे ही बात समाप्त हुई और फोन कटा बंसल ने देखा व्हाट्सएप पर दो नोटिफिकेशन पड़े थे। उसने सोचा कि कोई अर्जेंट तो नहीं है इसलिए मैसेज चैक किया तो देखा 'आजम भैया' के नाम से सेव नम्बर था मैसेज में लिखा था कि "आज तुम्हारी सारी क्लेश खत्म ही जाएगी तुम्हें नई जिंदगी की बधाइयां!" यह क्या! जितना बंसल चैट देखता जा रहा था उसके पैरों से उतनी ही जमीन खिसकती जा रही थी। क्योंकि उसकी जिंदगी के कुछ ही घंटे शेष बचे थे। क्योंकि आज आजम और उसकी पत्नी ने आजम के अन्य साथियों के साथ होटल में बंसल को मारने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था।
बंसल एक दम बदहवास सा दौड़ा और अपने पिता को सारी बात कह सुनाई। बलराम को अपनी सुनी बातों पर यकीन नहीं हुआ उन्होंने शीला से सारी बात बतायी। शीला, बंसल और बलराम एक साथ जब रजनी के पास पहुंचे और मैसेज दिखाते हुए पूछा तो रजनी का रूप एकदम बदल गया मानो चंडी सवार हो गई हो। उसने बंसल के हाथ से फोन छीनते हुए, आजम को फोन कर दिया और अपने कपड़े फाड़कर जोर-जोर से चिल्लाने लगी। आजम ने पुलिस को फोन कर दिया था इसलिए पुलिस भी आ गई। अब आजम रजनी का पक्षकार था। उसने रजनी के ससुर का पति के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा लिखवा दिया। पुलिस ने दोनों को जेल में भेज दिया। रजनी की सास अपनी जान को खतरा समझ अपने मायके चली गई।
अब आजम अपने तीन भाइयों और दो बहनों के साथ खुशी-खुशी बलराम के उस बंगले में रह रहा था जो उन्होंने विकास प्राधिकरण के बाबू की बेटी का फैसला कराने की मजबूरी इनाम बतौर लिया था। जब बलराम और उनके बेटे जमानत कर बापस लौटे तो सब कुछ हाथ से जा चुका था। सारी ज्वेलरी और नकदी भी रजनी के पास थी समयावधि पूर्ण हो जाने के कारण बंसल की नौकरी भी जा चुकी थी आज बंसल और बलराम अपने पैतृक गांव में एकांकी जीवन व्यतीत करते हुए देखे जा सकते है।
-दुष्यंत 'बाबा'
पुलिस लाईन, मुरादाबाद।
मो0-9758000057
👌👍
जवाब देंहटाएंआभार मित्र🙏🙏🙏
हटाएंअति उत्तम कथानक एवं शैली जो अंत बांधे रखती । लगे रहिये जनाब कारवां बढ़ने वाला हैं ।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद मित्र🙏
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