आलंबन (कुंडलिया)
आलंबन (कुंडलिया)
आलंबन
के रूप
में, पत्नी
रहे सामने
हाथ
भी लिखते
नही, लगते
है कांपने
लगते
है कांपने,
सुर ताल
कोई आत
नही
हास्य
की कविता
को, हँसकर
सुनात नही
सहमा
सा बैठा
रहत, गाते
सकुचाय मन
हरे-भरे
मंच पर
भी, पत्नी
हो आलंबन
-दुष्यंत 'बाबा'
पुलिस लाईन, मुरादाबाद।
मो0-9758000057
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