बाल श्याम (कुंडलिया)
बाल श्याम (कुंडलिया)
चढ़ाय रंग सबको हरि, यशोदा मन हर्षाय
पकरि-पकरि कर खींचती, बार-बार नहलाय
बार-बार नहलाय, माखन दे-दे समझाय
हँसत-खेलत श्याम को, नजर नही लग जाय
मैया भई है बावरि, इतनी जानत नाय
श्याम वर्ण है जन्म से, दूजो कौन चढ़ाय
-दुष्यंत 'बाबा'
पुलिस लाईन, मुरादाबाद।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें