श्याम की होली (कुंडलिया)
श्याम की होली (कुंडलिया)
श्याम बनाऊं निज चित, राधा तुम्हें बनाऊँ
होली खेलत मैं फिरू, कुंज गलिन विचराऊ
कुंज गलिन विचराऊ, न बचे कोई नर-नारि
प्रेम रंग की भर-भर कर, देउँ पिचकारि मारि
गोपि-ग्वाल संग खेलूं, करके मन निष्काम
श्याम रंग मोहि प्यारा, मेरे स्वामी श्याम
-दुष्यंत 'बाबा'
पुलिस लाईन, मुरादाबाद।
मो0-9758000057
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