जीवों पर दया करो (बाल कविता)
आओ बच्चों! तुम्हें सुनाऊँ
कहानी काली कुतिया की
गांव में रहती काली कुतिया
जगती थी वह सारी रतियाँ
भौंक-भौंक सबको जगाती
और चोरों को रोज भगाती
खाना खाने को घर आती
बचा-खुचा सारा खा जाती
प्यार करो तो पूँछ हिलाती
देखो कितना मन बहलाती
पांच पिल्ले हर साल ब्याती
सबके सबको दूध पिलाती
बड़े छूऐं तो आंख दिखाती
छोटे बच्चों का मन हर्षाती
गाँव छोड़ कभी दूर न जाती
सबके घर अधिकार जताती
माता जी व्याकुल हो जातीं
किसी रोज कुतिया न आती
कहीं-कहीं डंडे भी खा आती
अपना दुःख कह भी न पाती
यदि किसी से कष्ट पा जाती
आंखों से आंसू खूब बहाती
बच्चों! आज तुम एक प्रण करो
अब प्रकृति का अदा ऋण करो
अत्यधिक यदि न कर सकते तो
कम से कम जीवों से प्यार करो
बच्चों! तुमको कैसी लगी आज,
यह कहानी काली कुतिया की।
-दुष्यंत 'बाबा'
पुलिस लाईन, मुरादाबाद।
दिनांक-12-01-2021
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