मेरे घर अखबार नही आता
चैन नही आता करार नही आता,
जिस दिन मेरे घर अखबार नही आता।
नेता जी उदास रहते है उस दिन,
अबला का जिस दिन बलात्कार नही आता।
माताजी भी उदास रहती है उस दिन,
सीरियल वाला जिस दिन प्यार नही आता।
पिताजी भी उदास रहते है उस दिन,
मार्केट वाला जिस दिन व्यापार नही आता।
बबुआ भी उदास रहते है उस दिन,
क्रिकेट वाला जिस दिन छः चार नही आता।
दादी भी उदास रहती है उस दिन,
अध्यात्म वाला जिस दिन संस्कार नही आता।
'बाबा' भी उदास रहता है उस दिन,
ब्लॉगर का जिस दिन विचार नही आता।
चैन नही आता करार नही आता,
जिस दिन मेरे घर अखबार नही आता।
#दुष्यंत बाबा की कलम से
दिनांक-17/07/20
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